झूठ के पाँव नहीं होते आध्यात्मिक कहानियां

 झूठ के पाँव नहीं होते 
दोस्तों आज एक ऐसी कहानी शेयर कर रही हूँ जो आपने बचपन में बहुत सुनी होगी और आज भूल गए होंगे जब पढ़ेंगें तो याद आ जाएगी उस गडरिये की कहानी जिसने झूठ बोला और उसका क्या असर हुआ था..
पहाड़ की तराई में स्थित किसी गांव में एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शरारती था। वह अपने मित्रों के साथ तरह-तरह की शरारतें करता था तथा उन्हें बेवकूफ बनाता था। वह उन्हें बनावटी कहानियां सुनाता रहता था। जब उसके मित्र उन कहानियों पर विश्वास कर लेते थे तो वह लड़का उनकी हंसी उड़ाता और कहता, “अरे मूखों ! यह एक झूठी कहानी थी।’
ऐसी शरारतें करना उसकी आदत बन गई थी। वह सबसे झूठ बोलता रहता था। यहां तक कि वह अपने माता-पिता से भी झूठ बोलता था। उसके माता-पिता ने उसे सुधारने के कई प्रयत्न किए परंतु उसके कानों में जूं तक नहीं रेंगी। उसके अध्यापकों ने भी उसे कई बार समझाने का प्रयत्न किया परंतु वह नहीं सुधरा।
छुट्टियां शुरू हो गई। एक दिन उसके माता-पिता ने उससे भेड़ों को बाहर पहाड़ी पर ले जाकर घास चराने के लिए कहा। वह राजी हो गया। उसकी मां ने उसके लिए पोटली में भोजन बांधकर रख दिया। उस पोटली में उस लड़के ने अपनी बांसुरी, गुलेल तथा कंचे आदि रख लिए। जब वह दरवाजा खोलकर भेड़ों को घास चराने के लिए बाहर ले जाने लगा तो उसकी मां ने कहा, “बेटे, अपना ध्यान रखना। पहाड़ों पर बहुत सारे भेड़िए होते हैं। वे बहुत चतुर होते हैं। कभी-कभी भेड़िए एक झुंड बनाकर आते हैं और बच्चों तथा भेड़ों को पकड़कर दूर ले भागते हैं। तुम्हें सावधान रहना होगा।’ उस छोटे बच्चे ने अपनी मां से चिंता न करने को कहा और वहां से चल दिया।
फिर उसने अपनी लंबी छड़ी निकाली और तरह-तरह की आवाजें निकालता हुआ उन भेड़ों को पहाड़ों की तरफ ले जाने लगा। शीघ्र ही वह उन भेड़ों के साथ हरी-भरी घास से भरपूर एक स्थान पर पहुंच गया। उसने सोचा कि यहां उसकी भेड़ों को भरपूर चारा खाने को मिल जाएगा। यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसकी भेड़ें वहां घास चरने लगीं।
दोपहर में उसने अपना भोजन किया। फिर थोड़ी देर के लिए उसने बांसुरी बजाई। थोड़ी देर बाद वह बोर होने लगा। उसे उबासी आने लगी। तत्पश्चात् उसे एक शरारत करने की सूझी। उसके मन में एक विचार आया। उसे थोड़ी दूर पर लकड़हारों का एक समूह दिखाई दिया। वह लड़का तेजी से उनकी तरफ भागा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ ! भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ ! बचाओ !’
वे लकड़हारे अपनी-अपनी कुल्हाड़ियां लेकर उस लड़के की तरफ भागे। जब उन्होंने पूछा कि भेड़िया कहां है तो वह लड़का जोर से ठहाके मारता हुआ हंसने लगा और कहा, “यहां तो कोई भेड़िया नहीं है। मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रहा था, और आप सब लोग बेवकूफ बन गए।’ इस पर वे लकड़हरे बेहद नाराज़ हुए तथा उस लड़के को कोसते हुए वहां से चले गए।
कुछ दिनों बाद उस लड़के ने कुछ कुम्हारों को उसी जगह मिट्टी खोदते हुए देखा जहां पर वह अपनी भेड़ों को चराता था। उसे फिर से शरारत करने की सूझी। वह चिल्लाया, “बचाओ ! भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ ! बचाओ !’ कुम्हार अपना सारा काम-काज छोड़कर और अपने हाथों में डंडे तथा फावड़े लहराते हुए उस लड़के की ओर दौड़ पड़े। उस लड़के तक सबसे पहले पहुंचने वाले कुम्हार ने उससे पूछा, “कहां है भेड़िया?’ लड़के ने उनका उपहास करते हुए कहा, “भेड़िया! क्या? यहां तो कोई भेड़िया नहीं है। मैंने तो आप सबको बेवकूफ बनाया है।’ यह कहते हुए वह तालियां बजाकर जोर-जोर से हंसने लगा। कुम्हारों को उसकी बात पर बहुत क्रोध आया तथा उसे खूब अपशब्द कहकर वहां से चले गए।
छोटे लड़के की यह शरारत भरी कहानी पूरे गांव में फैल गई। गांव वालों ने आपस में यह चर्चा की कि वह बहुत ही झूठा है। वह बार-बार बेवजह ही ‘भेड़िया आया! भेड़िया आया!’ चिल्लाता रहता है और वहां से गुजर रहे लोगों को परेशान करता रहता है।
भेड़िया आया’ और जब तुम्हारी सहायता के लिए कोई आया तो तुमने उसका उपहास किया। इस बार चाहे तुमने सचमुच ही सहायता के लिए उनको पुकारा, परंतु इस बार वे तुम्हारी सहायता के लिए इसलिए नहीं आए, क्योंकि उन्हें लगा कि इस बार भी तुम उनके साथ मज़ाक कर रहे हो। बेवकूफ लड़के! तुम्हारे पिताजी को जब यह पता चलेगा कि तुमने उनकी चार भेड़ें खो दी हैं तो वे तुम पर बहुत ही नाराज़ होंगे।’
वह लड़का अपनी मां के चरणों में गिरकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसने प्रण किया कि वह भविष्य में कभी भी किसी से झूठ नहीं बोलेगा, क्योंकि वह जान गया था कि झूठ के पांव नहीं होते और झूठ का सहारा लेकर किसी का कभी भी भला नहीं हो सकता।
शिक्षा : इस कहानी (Story) Hindi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए/ बात-बात पर झूठ बोलते रहे तो हम बदनाम हो जाएंगे/ फिर हमारी बात का कोड़ विश्वास नहीं करेगा l
आशा करती हूँ कि आपको यह हिंदी कहानी पसंद आयी होगी l