अनमोल विचार विवेकानंद

1)हारना सबसे
बुरी विफलता नहीं है. कोशिश
ना करना ही सबसे बड़ी विफलता है.

2)सर्व प्राण्यापेक्षा मनुष्य हा अधिक श्रेष्ठ
आहे.त्याच्याहून उच्च कुणीही नाही
देवांना देखील पृथ्वीवर पुन:जन्म
घ्यावा लागतो आणि मानव देहांच्या द्वारे
मुक्ती प्राप्त करून घ्यावी लागते.केवळ
मनुष्यालाच पूर्णत्वाचा लाभ करून घेता
येतो.देवदेवतांना देखील नाही.----
स्वामी विवेकानंद

3)आयुष्यात काही करून दाखवायचे असेल तर आपण काय आहोत? यापेक्षा आपण काय होऊ शकतो याचा विचार करायला हवा, जगात अशक्य काहीच नसतं.

4)अरे विचार काय करतोस, काहितरी करून दाखव..
वेळ जाईन निघून, प्रवाहामध्ये तरून दाखव..
लाखो आले अन गेले, बोल घेवडे सगळे..
स्व:ता काही नाही केले, फ़क्त लोकाना उपदेश दिले..
उपदेशाचं कडू तु पिऊन तर बघ..
सत्याची कास धरून तर बघ..
कुणीतरी आपल्या भल्याच सांगत असतं..
एखाद्यावर विश्वास ठेवून तर बघ..
यश आपल्याच हातात असतं रे..
प्रयत्नाची पराकाष्टा करून तर बघ..
होशील खुप मोठा, स्व:तावर विश्वास ठेवून तर बघ..












आदर्श के लिए जियो अनमोल विचार

आदर्श के लिए जियो -
जो किसी बात की चिन्ता नहीं करता, उसके पास सब कुछ आप ही आप पहुंच जाता है। धन-सम्पत्ति तो चंचल नारी के समान है, वह उसकी परवाह नहीं करती जो उसे बहुत चाहता है। धन अपनी वर्षा उसके निकट आकर कर जाता है, जिसने उसकी परवाह कभी नहीं की, इसी प्रकार लोक-प्रसिद्धि भी इतनी अधिक मात्रा में आती है कि वह सिरदर्द और भार बन जाती है ये सब सदा स्वामी के पास जाते हैं। उनका दास कभी कुछ नहीं पाता।
स्वामी वही है जो उनके बिना भी रह सके, जिसका जीवन संसार की क्षुद्र एवं मूर्खतापूर्ण चीजों पर निर्भर नहीं करता। एक, और केवल एक आदर्श के लिए जियो। उस आदर्श को इतना महान, इतना शक्तिशाली बनाओ कि उसके अतिरिक्त अन्य कुछ अन्त:करण में रह ही न जाए। किसी अन्य वस्तु के लिए स्थान नहीं, किसी अन्य बात के लिए समय नहीं।


वसीयत और नसीहत कहानियां

वसीयत और नसीहत :
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एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत करते हुऐ कहा "बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों मे ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह ख्वाहिश जरूर पूरी करना ! बाप के मरते ही नहलाने के बाद बेटे ने आलिम से बाप की ख़ाहिश बताई, आलिम ने कहा हमारे दीन में सिर्फ कफ़न पहनाने की इज़ाज़त है, पर बेटे की ज़िद थी कि बाप की आखरी ख़ाहिश पूरी हो, बहस इतनी बढ़ गई की शहर के उलेमाओं को जमा किया गया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला,
इसी माहौल में एक शक़्स आया और आकर बेटे के हाथ मे बाप का लिखा हुवा खत दिया जिस मे बाप की नसीहत लिखी थी
"मेरे प्यारे बेटे"
देख रहे हो ? दौलत, बंगला , गाडी और बड़ी बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी मैं एक फटा हुवा मोजा तक नहीं ले जा सकता,
एक रोज़ तुम्हें भी मौत आएगी, आगाह हो जाओ तुम्हे भी एक कफ़न मे ही जाना पड़ेगा, लेहाज़ा कोशिश करना दौलत का सही इस्तेमाल करना,
नेक राह मैं ख़र्च करना, बेसहाराओं को सहारा बनना क्युकि क़ब्र में सिर्फ तुम्हारे कर्म ही जाएंगे"

झूठ के पाँव नहीं होते आध्यात्मिक कहानियां

 झूठ के पाँव नहीं होते 
दोस्तों आज एक ऐसी कहानी शेयर कर रही हूँ जो आपने बचपन में बहुत सुनी होगी और आज भूल गए होंगे जब पढ़ेंगें तो याद आ जाएगी उस गडरिये की कहानी जिसने झूठ बोला और उसका क्या असर हुआ था..
पहाड़ की तराई में स्थित किसी गांव में एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शरारती था। वह अपने मित्रों के साथ तरह-तरह की शरारतें करता था तथा उन्हें बेवकूफ बनाता था। वह उन्हें बनावटी कहानियां सुनाता रहता था। जब उसके मित्र उन कहानियों पर विश्वास कर लेते थे तो वह लड़का उनकी हंसी उड़ाता और कहता, “अरे मूखों ! यह एक झूठी कहानी थी।’
ऐसी शरारतें करना उसकी आदत बन गई थी। वह सबसे झूठ बोलता रहता था। यहां तक कि वह अपने माता-पिता से भी झूठ बोलता था। उसके माता-पिता ने उसे सुधारने के कई प्रयत्न किए परंतु उसके कानों में जूं तक नहीं रेंगी। उसके अध्यापकों ने भी उसे कई बार समझाने का प्रयत्न किया परंतु वह नहीं सुधरा।
छुट्टियां शुरू हो गई। एक दिन उसके माता-पिता ने उससे भेड़ों को बाहर पहाड़ी पर ले जाकर घास चराने के लिए कहा। वह राजी हो गया। उसकी मां ने उसके लिए पोटली में भोजन बांधकर रख दिया। उस पोटली में उस लड़के ने अपनी बांसुरी, गुलेल तथा कंचे आदि रख लिए। जब वह दरवाजा खोलकर भेड़ों को घास चराने के लिए बाहर ले जाने लगा तो उसकी मां ने कहा, “बेटे, अपना ध्यान रखना। पहाड़ों पर बहुत सारे भेड़िए होते हैं। वे बहुत चतुर होते हैं। कभी-कभी भेड़िए एक झुंड बनाकर आते हैं और बच्चों तथा भेड़ों को पकड़कर दूर ले भागते हैं। तुम्हें सावधान रहना होगा।’ उस छोटे बच्चे ने अपनी मां से चिंता न करने को कहा और वहां से चल दिया।
फिर उसने अपनी लंबी छड़ी निकाली और तरह-तरह की आवाजें निकालता हुआ उन भेड़ों को पहाड़ों की तरफ ले जाने लगा। शीघ्र ही वह उन भेड़ों के साथ हरी-भरी घास से भरपूर एक स्थान पर पहुंच गया। उसने सोचा कि यहां उसकी भेड़ों को भरपूर चारा खाने को मिल जाएगा। यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसकी भेड़ें वहां घास चरने लगीं।
दोपहर में उसने अपना भोजन किया। फिर थोड़ी देर के लिए उसने बांसुरी बजाई। थोड़ी देर बाद वह बोर होने लगा। उसे उबासी आने लगी। तत्पश्चात् उसे एक शरारत करने की सूझी। उसके मन में एक विचार आया। उसे थोड़ी दूर पर लकड़हारों का एक समूह दिखाई दिया। वह लड़का तेजी से उनकी तरफ भागा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ ! भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ ! बचाओ !’
वे लकड़हारे अपनी-अपनी कुल्हाड़ियां लेकर उस लड़के की तरफ भागे। जब उन्होंने पूछा कि भेड़िया कहां है तो वह लड़का जोर से ठहाके मारता हुआ हंसने लगा और कहा, “यहां तो कोई भेड़िया नहीं है। मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रहा था, और आप सब लोग बेवकूफ बन गए।’ इस पर वे लकड़हरे बेहद नाराज़ हुए तथा उस लड़के को कोसते हुए वहां से चले गए।
कुछ दिनों बाद उस लड़के ने कुछ कुम्हारों को उसी जगह मिट्टी खोदते हुए देखा जहां पर वह अपनी भेड़ों को चराता था। उसे फिर से शरारत करने की सूझी। वह चिल्लाया, “बचाओ ! भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ ! बचाओ !’ कुम्हार अपना सारा काम-काज छोड़कर और अपने हाथों में डंडे तथा फावड़े लहराते हुए उस लड़के की ओर दौड़ पड़े। उस लड़के तक सबसे पहले पहुंचने वाले कुम्हार ने उससे पूछा, “कहां है भेड़िया?’ लड़के ने उनका उपहास करते हुए कहा, “भेड़िया! क्या? यहां तो कोई भेड़िया नहीं है। मैंने तो आप सबको बेवकूफ बनाया है।’ यह कहते हुए वह तालियां बजाकर जोर-जोर से हंसने लगा। कुम्हारों को उसकी बात पर बहुत क्रोध आया तथा उसे खूब अपशब्द कहकर वहां से चले गए।
छोटे लड़के की यह शरारत भरी कहानी पूरे गांव में फैल गई। गांव वालों ने आपस में यह चर्चा की कि वह बहुत ही झूठा है। वह बार-बार बेवजह ही ‘भेड़िया आया! भेड़िया आया!’ चिल्लाता रहता है और वहां से गुजर रहे लोगों को परेशान करता रहता है।
भेड़िया आया’ और जब तुम्हारी सहायता के लिए कोई आया तो तुमने उसका उपहास किया। इस बार चाहे तुमने सचमुच ही सहायता के लिए उनको पुकारा, परंतु इस बार वे तुम्हारी सहायता के लिए इसलिए नहीं आए, क्योंकि उन्हें लगा कि इस बार भी तुम उनके साथ मज़ाक कर रहे हो। बेवकूफ लड़के! तुम्हारे पिताजी को जब यह पता चलेगा कि तुमने उनकी चार भेड़ें खो दी हैं तो वे तुम पर बहुत ही नाराज़ होंगे।’
वह लड़का अपनी मां के चरणों में गिरकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसने प्रण किया कि वह भविष्य में कभी भी किसी से झूठ नहीं बोलेगा, क्योंकि वह जान गया था कि झूठ के पांव नहीं होते और झूठ का सहारा लेकर किसी का कभी भी भला नहीं हो सकता।
शिक्षा : इस कहानी (Story) Hindi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए/ बात-बात पर झूठ बोलते रहे तो हम बदनाम हो जाएंगे/ फिर हमारी बात का कोड़ विश्वास नहीं करेगा l
आशा करती हूँ कि आपको यह हिंदी कहानी पसंद आयी होगी l




मृत्यु कहानियां

मृत्यु 
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भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर गए।द्वार पर गरुड़ को छोड़ कर खुद शिव से मिलने अंदर चले गए। तब कैलाश की अपूर्व प्राकृतिक शोभा
को देख कर गरुड़ मंत्रमुग्ध थे कि तभी उनकी नजर एक खूबसूरत छोटी सी चिड़िया पर पड़ी।
चिड़िया कुछ इतनी सुंदर थी कि गरुड़ के सारे विचार उसकी तरफ आकर्षित होने लगे। उसी समय कैलाश पर यम देव पधारे और अंदर जाने से पहले उन्होंने उस छोटे से पक्षी को आश्चर्य की द्रष्टि से देखा। गरुड़ समझ गए उस चिड़िया का अंत निकट है और यमदेव कैलाश से निकलते ही उसे अपने साथ यमलोक ले जाएँगे।
गरूड़ को दया आ गई। इतनी छोटी और सुंदर चिड़िया को मरता हुआ नहीं देख सकते थे। उसे अपने पंजों में दबाया और कैलाश से हजारो कोश दूर एक जंगल में एक चट्टान के ऊपर छोड़ दिया, और खुद बापिस कैलाश पर आ गया।
आखिर जब यम बाहर आए तो गरुड़ ने पूछ ही लिया कि उन्होंने उस चिड़िया को इतनी आश्चर्य भरी नजर से क्यों देखा था। यम देव बोले "गरुड़ जब मैंने उस चिड़िया को देखा तो मुझे ज्ञात हुआ कि वो चिड़िया कुछ ही पल बाद यहाँ से हजारों कोस दूर एक नाग द्वारा खा ली जाएगी। मैं सोच रहा था कि वो इतनी जलदी इतनी दूर कैसे जाएगी, पर अब जब वो यहाँ नहीं है तो निश्चित ही वो मर चुकी होगी।"
गरुड़ समझ गये "मृत्यु टाले नहीं टलती.... चाहे कितनी भी चतुराई की जाए।"



प्रेम की दीक्षा कहानियां

एक आचार्य के पास एक युवक दीक्षा के 
लिए आया। आचार्य ने उससे पूछा - क्या 
तुम मुझसे दीक्षा लेने के लिए अपना घर 
छोड़कर आए हो। युवक ने हामी भरी।
इस पर आचार्य ने पुनः सवाल किया ---
क्या तुम अपने घरवालों से प्रेम नहीं
करते ? युवक बोला -- नहीं आचार्य, मेरे
घरवाले ही मुझसे प्रेम नहीं करते।
आचार्य ने मुस्कराते हुए कहा -- प्रिय वत्स !
पहले तुम उनमें अपने लिए प्रेम पैदा करो।
यही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। हो
सकता है उसके बाद तुम्हें मेरी दीक्षा की
जरूरत ही न पड़े।



कबीर ने दिखाया सन्मार्ग






-------------------= कबीर ने दिखाया सन्मार्ग =--------------------
बरसात का मौसम था। कबीर साहेब जुलाहे का काम करके अपना पेट पालते थे। 
उस दिन कपड़े बेचने वे बाजार नहीं जा पाये। तभी कुछ संत-महात्मा अचानक उनके घर आ गए। घर में भोजन सामग्री कम ही थी। कबीर ने अपनी पत्नी लोई से पूछा, ' क्या किसी दुकानदार से कुछ आटा-दाल ला सकती हो, पैसा बाद में चुका देंगे। '
लोई कुछ दुकानदारों के पास गयीं। पर सभी ने उधार देने से इंकार कर दिया। एक गरीब जुलाहे को कौन उधार देता, जिसकी कोई निश्चित आय भी नहीं थी। लोई इधर-उधर भटक रही थी आखिर एक दुकानदार उधार देने को तैयार हो गया पर उसने यह शर्त रखी कि वह रात भर उसके घर रहे। दुकानदार की नीचता भरी शर्त उसे बुरी तो बहुत लगी, पर वह खामोश रही। उसे जितना सामान चाहिए था, दुकानदार ने दे दिया।
घर आकर लोई ने खाना बनाया और जो बातचीत दुकानदार से हुई थी, कबीर साहेब को बता दी। कबीर साहेब ने कहा कि दुकानदार का कर्ज चुकाने का वक्त आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि चिंता मत करना, मालिक सब ठीक करेगा। जब वह तैयार हो गयी, तो उन्होंने कहा, ' बारिश हो रही है और गली में कीचड़ भरी है। तुम कंबल ओढ़ लो मैं तुम्हें कंधे पर उठाकर ले चलता हूं। ' जल्दी ही दोनों दुकानदार के घर पहुंच गए। लोई अंदर चली गयी और कबीर साहेब दरवाजे के बाहर उसका इन्तजार करने लगे। लोई को देखकर दुकानदार बहुत खुश हुआ, पर जब उसने देखा कि बारिश के बावजूद न लोई के कपड़े भींगे हैं और न पांव, तो उसे बहुत हैरानी हुई। उसने पूछा, ' क्या कारण है कि कीचड़ से भरी गली में से तुम आयी हो, फिर भी तुम्हारे पांव बिल्कुल सूखे हैं। ' लोई ने कहा, ' इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है, मेरे पति मुझे कंबल ओढ़ाकर अपने कंधे पर बिठाकर यहां लाये हैं। '
यह सुनकर दुकानदार दंग रह गया। लोई का निर्मल, निष्पाप चेहरा देखकर वह अविश्वास से उसे देखता रहा। जब लोई ने कहा कि उसके पति कबीर साहेब वापस ले जाने के लिए बाहर इन्तजार कर रहे हैं तो दुकानदार अपनी नीचता और कबीर साहेब की महानता को देख शर्म से पानी-पानी हो गया उसने लोई और कबीर साहेब दोनों से घुटने टेककर माफ़ी मांगी। कबीर बोले, ' उठो भाई, सभी कभी न कभी रास्ते से भटक जाते हैं। 'कबीर साहेब और उनकी पत्नी अपने घर लौट आये। दुकानदार सुबह कबीर साहेब के घर आ पहुंचा और उनका शिष्य बन गया।
सच ही है, संत भटके हुए लोगों को सन्मार्ग दिखाने के लिए अपने ही तरीके अपनाते हैं।


आधी रोटी का कर्ज कहानियां

.आधी रोटी का कर्ज...
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पत्नी बार बार मां पर इल्जाम लगाए जा रही थी और पति बार बार उसको अपनी हद में रहने की कह रहा था...लेकिन पत्नी चुप होने का नाम ही नही ले रही थी व् जोर जोर से चीख चीखकर कह रही थी कि....
"उसने अंगूठी टेबल पर ही रखी थी और तुम्हारे और मेरे अलावा इस कमरें मे कोई नही आया तो ...अंगूठी हो ना हो मां जी ने ही उठाई है......।।
बात जब पति की बर्दाश्त के बाहर हो गई तो उसने पत्नी के गाल पर एक जोरदार तमाचा दे मारा ....अभी तीन महीने पहले ही तो शादी हुई थी ।पत्नी से तमाचा सहन नही हुआ..वह घर छोड़कर जाने लगी और जाते जाते पति से एक सवाल पूछा कि तुमको अपनी मां पर इतना विश्वास क्यूं है..??
तब पति ने जो जवाब दिया उस जवाब को सुनकर दरवाजे के पीछे खड़ी मां ने सुना तो उसका मन भर आया..
पति ने पत्नी को बताया कि..."जब वह छोटा था तब उसके पिताजी गुजर गए तब मां मोहल्ले के घरों मे झाडू पोछा लगाकर जो कमा पाती थी उससे एक वक्त का खाना आता था .मां एक थाली में मुझे परोसा देती थी और खाली डिब्बे को ढककर रख देती थी और कहती थी मेरी रोटियां इस डिब्बे में है.......बेटा तू खा ले ...
मैं भी हमेशा आधी रोटी खाकर कह देता था कि मां मेरा पेट भर गया है मुझे और नही खाना है..मां ने मुझे मेरी झूठी आधी रोटी खाकर मुझे पाला पोसा और बड़ा किया है ..
आज मैं दो रोटी कमाने लायक हो गया हूं लेकिन यह कैसे भूल सकता हूं कि मां ने उम्र के उस पड़ाव पर अपनी इच्छाओं को मारा है,
वह मां आज उम्र के इस पड़ाव पर किसी अंगूठी की भूखी होगी ....?????...यह मैं सोच भी नही सकता ...तुम तो तीन महीने से मेरे साथ हो..लेकिन मैंने तो मां की तपस्या को पिछले पच्चीस वर्षों से देखा है...
यह सुनकर मां की आँखें छलक पड़ीं वह समझ नही पा रही थी कि..
बेटा उसकी आधी रोटी का कर्ज चुका रहा है...
या ...
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वह बेटे की आधी रोटी का कर्ज...

बेटी की कहानियां

।।।।।।।।।। बेटियों ।।।।।।।।।।।।।।।।।
एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
चेहरे पर झलकता आक्रोश...
संत ने पूछा - बोलो बेटी क्या बात है?
बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है।
वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है।
यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि।
संत मुस्कुराए और कहा...
बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं।
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समाज में।
अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में।
एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी।
उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा।
क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी।
समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी प्रकार की है।
पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता।
बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में।
पूरी सभा में चुप्पी छा गई।
उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क।।।
संसार की सभी करुणामई माताओं को बारम्बार सादर नमस्कार !!



मूर्तिकार का अहंकार कहानियां


"मूर्तिकार का अहंकार "
एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी सजीव मूर्तियाँ बनाता था, जो सजीव
लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था।
उसे जब लगा कि जल्दी ही उसकी मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया। यमदूतों को भ्रमित करने के लिये उसने एकदम अपने जैसी दस मूर्तियाँ बना डालीं और योजनानुसार उन बनाई गई मूर्तियों के बीच मे वह स्वयं जाकर बैठ गया। यमदूत जब उसे लेने आए तो एक जैसी ग्यारह आकृतियाँ देखकर स्तम्भित रह गए। इनमें से वास्तविक मनुष्य कौन है- नहीं पहचान पाए।
वे सोचने लगे, अब क्या किया जाए। मूर्तिकार के प्राण अगर न ले सके तो सृष्टि का नियम टूट जाएगा और सत्य परखने के लिये मूर्तियाँ तोड़ें तो कला का अपमान होगा।
अचानक एक यमदूत को मानव स्वभाव के सबसे बड़े दुर्गुण अहंकार की स्मृति आई। उसने चाल चलते हुए कहा- "काश इन मूर्तियों को बनाने वाला मिलता तो मैं उसे बताता कि मूर्तियाँ तो अति सुंदर बनाई हैं,लेकिन इनको बनाने में एक त्रुटि रह गई।" यह सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा कि मेरी कला में कमी कैसे रह सकती है, फिर इस कार्य में तो मैंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। वह बोल उठा-
"कैसी त्रुटि?"
झट से यमदूत ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, बस यही त्रुटि कर गए
तुम अपने अहंकार में
क्या जानते नहीं कि बेजान मूर्तियाँ बोला नहीं करतीं...

दो दोस्त कहानियां

एक बार दो दोस्त घूमते हुए एक महल के पास पहुँच गए तो, 
पहले दोस्त ने उस शानदार महल को देखकर कहा की जब इनमें रहने वालों की किस्मत लिखी जा रही थी तब हम कहाँ थे??
दूसरा दोस्त पहल वाले का हाथ पकड़ कर अस्पताल ले गया और मरीजो को दिखाते हुए कहा कि जब इनकी किस्मत लिखी जा रही थी तब हम कहाँ थे??
मित्रों भगवान ने हमें जो भी दिया उसमें हमेशा खुश रहिये।
किसी संत ने क्या खूब कहा है कि तुम अपने पुराने जूतों को देखकर क्यों परेशान होते हो दुनिया में तो कई लोग ऐसे भी हैं जिनके तो पैर ही नहीं हैं
उस मालिक का हर हाल में शुक्र करना सीखें। आज भी तेरा शुक्राना, कल भी तेरा शुक्राना, हर पल तेरा शुक्राना।
शुक्राना तेरा शुक्राना तेरा शुक्राना तेरा

नीयत का फल आध्यात्मिक कहानियां





 नीयत का फल 💕💕💕💕
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कुछ धनी किसानों ने मिलकर खेती के लिए एक कुँआ बनवाया. पानी निकालने के लिए सबकी अपनी-अपनी बारी बंधी थी.
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कुंआ एक निर्धन किसान के खेतों के पास था लेकिन चूंकि उसने कुंआ बनाने में धन नहीं दिया था इसलिए उसे पानी नहीं मिलता था.
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धनी किसानों ने खेतों में बीज बोकर सिंचाई शुरू कर दी. निर्धन किसान बीज भी नहीं बो पा रहा था. उसने धनवानों की बड़ी आरजू मिन्नत की लेकिन एक न सुनी गई.
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निर्धन बरसात से पहले खेत में बीज भी न बो पाया तो भूखा मर जाएगा. अमीर किसानों ने इस पर विचार किया. उन्हें किसान पर दया आ गई इसलिए सोचा कि उसे बीज बोने भर का पानी दे ही दिया जाए.
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उन्होंने एक रात तीन घंटे की सिंचाई का मौका दे दिया.
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उसे एक रात के लिए ही मौका मिला था. वह रात बेकार न जाए यह सोचकर एक किसान ने मजबूत बैलों का एक जोड़ा भी दे दिया ताकि वह पर्याप्त पानी निकाल ले.
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निर्धन तो जैसे इस मौके की तलाश में था. उसने सोचा इन लोगों ने उसे बहुत सताया है. आज तीन घंटे में ही इतना पानी निकाल लूंगा कि कुछ बचेगा ही नहीं.
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इसी नीयत से उसने बैलों को जोता पानी निकालने लगा.
बैलों को चलाकर पानी निकालने लगा. पानी निकालने का नियम है कि बीच-बीच में हौज और नाली की जांच कर लेनी चाहिए कि पानी खेतों तक जा रहा है या नहीं.
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लेकिन उसके मन में तो खोट था. उसने सोचा हौज और नाली सब दुरुस्त ही होंगी. यदि बैलों को छोड़कर उन्हें जांचने गया तो वे खड़े हो जाएंगे.
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उसे तो अपने खेतों में बीज बोने से अब मतलब नहीं था. उसे तो कुंआ खाली करना था ताकि किसी के लिए पानी बचे ही नहीं.
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वह ताबडतोड़ बैलों पर डंडे बरसाता रहा. डंडे के चोट से बैल भागते रहे और पानी निकलता रहा.
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तीन घंटे का समय पूरा होते ही दूसरा किसान पहुंच गया जिसकी पानी निकालने की बारी थी.
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कुआं दूसरे किसान को देने के लिए इसने बैल खोल लिए और अपने खेत देखने चला.
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वहां पहुंचकर वह छाती पीटकर रोने लगा. खेतों में तो एक बूंद पानी नहीं पहुंचा था. उसने हौज और नाली की तो चिंता ही नहीं की थी. सारा पानी उसके खेत में जाने की बजाय कुँए के पास एक गड़ढ़े में जमा होता रहा.
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अंधेरे में वह किसान खुद उस गडढ़े में गिर गया. पीछे-पीछे आते बैल भी उसके ऊपर गिर पड़े. वह चिल्लाया तो दूसरा किसान भागकर आया और उसे किसी तरह निकाला.
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दूसरे किसान ने कहा- परोपकार के बदले नीयत खराब रखने की यही सजा होती है. तुम कुँआ खाली करना चाहते थे. यह पानी तो रिसकर वापस कुँए में चला जाएगा लेकिन तुम्हें अब कोई फिर कभी न अपने बैल देगा, न ही कुँआ.
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तृष्णा यही है. मानव देह बड़ी मुश्किल से मिलता है. इंद्रियां रूपी बैल मिले हैं हमें अपना जीवन सत्कर्मों से सींचने के लिए लेकिन तृष्णा में फंसा मन सारी बेईमानी पर उतर आता है. परोपकार को भी नहीं समझता l
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ईश्वर से क्या छुपा. वह कर्मों का फल देते हैं लेकिन फल देने से पहले परीक्षा की भी परंपरा है. उपकार के बदले अपकार नहीं बल्कि ऋणी होना चाहिए तभी प्रभु आपको इतना क्षमतावान बनाएंगे कि आप किसी पर उपकार का सुख ले सकें.l
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जो कहते हैं कि लाख जतन से भी प्रभु कृपालु नहीं हो रहे, उन्हें विचारना चाहिए कि कहीं उनके कर्मों में कोई ऐसा दोष तो नहीं जिसकी वह किसान की तरह अनदेखी कर रहे हैं और भक्ति स्वीकर नहीं हो रही.l
💕💕💕 जय श्री साई राम जी ।।।।।।।
🌻साई नाथ महराज जी जय।।।।।

शाही स्नान कहानियां



"शाही स्नान"
शाही स्नान का पर्व था। राम घाट पर भारी भीड़ लग रही थी।
शिव पार्वती आकाश से गुजरे। पार्वती ने इतनी भीड़ का कारण पूछा - आशुतोष ने कहा - सिंघस्त कुम्भ पर्व पर शाही स्नान करने वाले स्वर्ग जाते है। उसी लाभ के लिए यह स्नानार्थियों की भीड़ जमा है।
पार्वती का कौतूहल तो शान्त हो गया पर नया संदेह उपज पड़ा, इतनी भीड़ के लायक स्वर्ग में स्थान कहाँ है? फिर लाखों वर्षों से लाखों लाख लोग इस आधार पर स्वर्ग पहुँचते तो उनके लिए स्थान भी तो कहीं रहता?
छोटे से स्वर्ग में यह कैसे बनेगा? भगवती ने अपना नया सन्देह प्रकट किया और समाधान चाहा।
भगवान शिव बोले - शरीर को गीला करना एक बात है और मन की मलीनता धोने वाला स्नान जरूरी है। मन को धोने वाले ही स्वर्ग जाते हैं। वैसे लोग जो होंगे उन्हीं को स्वर्ग मिलेगा।
सन्देह घटा नहीं, बढ़ गया।
पार्वती बोलीं - यह कैसे पता चले कि किसने शरीर धोया किसने मन संजोया।
यह कार्य से जाना जाता है। शिवजी ने इस उत्तर से भी समाधान न होते देखकर प्रत्यक्ष उदाहरण से लक्ष्य समझाने का प्रयत्न किया।
मार्ग में शिव कुरूप कोढ़ी बनकर पड़े रहे। पार्वती को और भी सुन्दर सजा दिया। दोनों बैठे थे। स्नानार्थियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुकती। अनमेल स्थिति के बारे में पूछताछ करती।
पार्वती जी रटाया हुआ विवरण सुनाती रहतीं। यह कोढ़ी मेरा पति है। गंगा स्नान की इच्छा से आए हैं। गरीबी के कारण इन्हें कंधे पर रखकर लाई हूँ। बहुत थक जाने के कारण थोड़े विराम के लिए हम लोग यहाँ बैठे हैं।
अधिकाँश दर्शकों की नीयत डिगती दिखती। वे सुन्दरी को प्रलोभन देते और पति को छोड़कर अपने साथ चलने की बात कहते।
पार्वती लज्जा से गढ़ गई। भला ऐसे भी लोग स्नान को आते हैं क्या? निराशा देखते ही बनती थी।
संध्या हो चली। एक बहुत ही उदार व्यक्ति आए। विवरण सुना तो आँखों में आँसू भर लाए। सहायता का प्रस्ताव किया और कोढ़ी को कंधे पर लादकर तट तक पहुँचाया। जो सत्तू साथ में था उसमें से उन दोनों को भी खिलाया।
साथ ही सुन्दरी को बार-बार नमन करते हुए कहा - आप जैसी देवियां ही इस धरती की स्तम्भ हैं। धन्य हैं आप जो इस प्रकार अपना धर्म निभा रही हैं।
प्रयोजन पूरा हुआ। शिव पार्वती उठे और कैलाश की ओर चले गए। रास्ते में कहा - पार्वती इतनों में एक ही व्यक्ति ऐसा था, जिसने मन धोया और स्वर्ग का रास्ता बनाया। स्नान का महात्म्य तो सही है पर उसके साथ मन भी धोने की शर्त लगी है।
पार्वती तो समझ गई कि स्नान महात्म्य सही होते हुए भी... क्यों लोग उसके पुण्य फल से वंचित रहते हैं?

कहाँ हैं भगवान ? आध्यात्मिक कहानियां




कहाँ हैं भगवान ?
कहाँ हैं भगवान ?
एक आदमी हमेशा की तरह अपने नाई की दूकान पर बाल कटवाने गया . बाल कटाते वक़्त अक्सर देश-दुनिया की बातें हुआ करती थीं ….आज भी वे सिनेमा , राजनीति , और खेल जगत , इत्यादि के बारे में बात कर रहे थे कि अचानक भगवान् के अस्तित्व को लेकर बात होने लगी .
नाई ने कहा , “ देखिये भैया , आपकी तरह मैं भगवान् के अस्तित्व में यकीन नहीं रखता .”
“ तुम ऐसा क्यों कहते हो ?”, आदमी ने पूछा .
“अरे , ये समझना बहुत आसान है , बस गली में जाइए और आप समझ जायेंगे कि भगवान् नहीं है . आप ही बताइए कि अगर भगवान् होते तो क्या इतने लोग बीमार होते ?इतने बच्चे अनाथ होते ? अगर भगवान् होते तो किसी को कोई दर्द कोई तकलीफ नहीं होती ”, नाई ने बोलना जारी रखा , “ मैं ऐसे भगवान के बारे में नहीं सोच सकता जो इन सब चीजों को होने दे . आप ही बताइए कहाँ है भगवान ?”
आदमी एक क्षण के लिए रुका , कुछ सोचा , पर बहस बढे ना इसलिए चुप ही रहा .
नाई ने अपना काम ख़तम किया और आदमी कुछ सोचते हुए दुकान से बाहर निकला और कुछ दूर जाकर खड़ा हो गया. . कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसे एक लम्बी दाढ़ी – मूछ वाला अधेड़ व्यक्ति उस तरफ आता दिखाई पड़ा , उसे देखकर लगता था मानो वो कितने दिनों से नहाया-धोया ना हो .
आदमी तुरंत नाई कि दुकान में वापस घुस गया और बोला , “ जानते हो इस दुनिया में नाई नहीं होते !”
“भला कैसे नहीं होते हैं ?” , नाई ने सवाल किया , “ मैं साक्षात तुम्हारे सामने हूँ!! ”
“नहीं ” आदमी ने कहा , “ वो नहीं होते हैं वरना किसी की भी लम्बी दाढ़ी – मूछ नहीं होती पर वो देखो सामने उस आदमी की कितनी लम्बी दाढ़ी-मूछ है !!”
“ अरे नहीं भाईसाहब नाई होते हैं लेकिन बहुत से लोग हमारे पास नहीं आते .” नाई बोला
“बिलकुल सही ” आदमी ने नाई को रोकते हुए कहा ,” यही तो बात है , भगवान भी होते हैं पर लोग उनके पास नहीं जाते और ना ही उन्हें खोजने का प्रयास करते हैं, इसीलिए दुनिया में इतना दुःख-दर्द है.”



परश्या आर्चि jokes

नेत्याच्या नशिबी खुर्ची 😃
,
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परश्याच्या नशिबी आर्चि😀😀
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तुमच्या नशिबी घरची😀😀😀
अणि आमच्या नशिबी काय माहीत..
कसी मिळते लवंगी मिर्ची😅😅😅
एक अविवाहित तरुण

शादी क्या है jokes

😜  ';';शादी क्या है';'; 😱

बिजली के दो तार

सही जुड़े तो प्रकाश ही प्रकाश

गलत जुड़े तो
धमाके ही धमाके
😂😂😂😝😜 😜

                  आपला
                तात्या वायरमन

Girls makeup jokes in marathi

मुलींना मेक अप धुण्याआधी त्यांचा आत्मा नक्कीच विचारत असेल
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:.
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Are you sure you want to restore factory settings?😝😝😝😝

आर्ची marathi jokes

इंग्रजीत नापास झालेल्या विद्यार्थ्यांनी काळजी करू नए
कारण...😎















इंग्रजी मध्ये फेल झालेल्यांना आर्ची इंग्लिश मध्ये शिकवणार...🙋
�😝😝😝😄😂😂😂

रात्रीस खेळ चाले jokes

बारावीचा निकाल जाहिर.... कोकण विभागाचा निकाल सर्वाधिक ९३.२९...

"रात्रीस खेळ चाले" मालीकेच्या प्रभावामुळे कोकणातील मुलांनी रात्री बाहेर न फिरता जोरदार अभ्यास केला... या बद्दल मालिकेचे व सर्व यशस्वी विध्यार्थ्यांचे अभिनंदन...😜

आर्ची jokes

कोणाकडे दहावीची जुनी पुस्तक
आहेत का ??????
.

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आर्चीला हवी आहेत..

😂😂😂😂😂😂

3 Sawal, 1 jawab puzzles











1 baba 1 bachi K Sath 1 murghi Lekar Ja Rhe the. Raste Me 1 aadmi Ne Unse 3 Sawal Poche..

1. Apki Umar Kitni Hai?

2. Is Bachi Ka Ap Se Kya Rishta Hai?

3. Is Murgi Ki Kimat Kitni Hai?

Buzurg Ne Sirf 1 word Bola Aur 3 Sawal K Jawab mil Gaye… Ab Batao Wo word Kaun Sa Tha?

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100 ki note ke chhute karo jisme 10 ki note na ho aur note sirf 10 ho?






                    100 ki note ke chhute karo jisme 10 ki note na ho aur note sirf 10 ho?

6 Sawal 6 Challenges puzzles and answer


6 Sawal 6 Challenges;
1. Kis Shakhs Ka Birthday
Har Saal Nahi Aata?
Ans_
2. Dhoop Me Kya Chiz
Nahi Sukh Sakti?
Ans_
3. Kon Sa fal Mitha Hone Ke
Bawjud Sale Nahi Hota?
Ans_
4. Konsi Chiz Hai JisKa
Naam Lo to Wo Tut Jati
Hai?
Ans_
5. Wo Kon Hai Jo Bager
Pair Ke Bhagta Hai or Lot
Kar Nahi Aata?
Ans_
6. Kon si Machli Samandar
Me Nahi Tair Sakati?
Ans_
Is there anybody who can
ans these GK Questions??
Absolutely amazing!



Ansr karo... Main toh A








 1. Kis Shakhs Ka Birthday
Har Saal Nahi Aata?
Ans_ 29 feb

2. Dhoop Me Kya Chiz
Nahi Sukh Sakti?
Ans_ paseena
3. Kon Sa fal Mitha Hone Ke
Bawjud Sale Nahi Hota?
Ans_ sabra ka fal
4. Konsi Chiz Hai JisKa
Naam Lo to Wo Tut Jati
Hai?
Ans_ khamosi
5. Wo Kon Hai Jo Bager
Pair Ke Bhagta Hai or Lot
Kar Nahi Aata?
Ans_ time
6. Kon si Machli Samandar
Me Nahi Tair Sakati?
Ans_ mari hui ma6li




Wo kaun si cheez hai.. Jo Puzzle and answer





Wo kaun si cheez hai..
Jo
Banane wala bech deta hai..
Khareedne wala istemaal nahi karta...
Aur
Jo istemal karta hai usko maloom nahi hota...
CHALLANGE.
Reply Fast.----------ans

Wo kiya chaiz hai Jo raat ko qabron per ghomti hai|and answer




Wo kiya chaiz hai
Jo raat ko qabron per ghomti hai

Or din ko mehel me aa jati hai
Mard us se darte hian
or auraten use pasnd karti hain
Bachay is se khelte hain
is ki khorak namak or khajoor hai
is ke jism par oun or baal hain
is ka naam meem se ata hai
Quraan me bhe is ka zikar hai
Batao wo kiya hai socho pocho jis se chaho jawab do.
reply lazmi.

Wo kya cheez hai jo khana haram hai peena halal |answer






Wo kya chiz h jo khana haram h or pina halal h din se jyada safed h or raat se jyada kaali h. Aadmi din me 3 baar esteymaal karta h but auorat saal me 1 baar esteymaal karti h.wa kya chiz h answar do



Wo kya cheez hai jo saal me 1 baar mahine me 2 baar and answer







Dimag hai to
answer do!

Vo kya chiz hai
jo saal me 1 bar,
mahine me 2 bar,

hafte me 4 bar,
aur din me 6 bar
aati hai..?

It's challange 4 u.
Ans me..?..
It's Challenge 4 u






Answer :



What is a thing which comes once in a year twice in a month four times in a week and six times in a day? 
The answer is odd numbers 

year = 12 ... the '1' is odd (that's 1) 
month = 4 weeks, so there's 2 odd weeks '1' and '3' (that's 2) 
Week = 7 days... 1,3,5,and7 are odd (that's 4) 
day =12 hours ... 1,3,5,7,9,11 are odd (...that's 6)

रात्रीच्या दाट अंधारात | Kodi marathi







  रात्रीच्या  दाट अंधारात
      झाडावर नभीच्या चांदण्या
     कशा काय उमलल्या?
     मंद सुगंधाचा दरवळ
     कुठल्या राणीचा आला?
     ओळखा  कोण?

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कंबर बारीक ,आयाळ छान | marathi kodi





कंबर बारीक ,आयाळ छान
      एक पंजा पडला तर ,तुमचा जाईल प्राण
      याची गर्जना ऐकताच सारेजण घाबरतात
      'जंगलचा राजा 'असे याला म्हणतात
      ओळखा  कोण?