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प्रेम की दीक्षा कहानियां

एक आचार्य के पास एक युवक दीक्षा के 
लिए आया। आचार्य ने उससे पूछा - क्या 
तुम मुझसे दीक्षा लेने के लिए अपना घर 
छोड़कर आए हो। युवक ने हामी भरी।
इस पर आचार्य ने पुनः सवाल किया ---
क्या तुम अपने घरवालों से प्रेम नहीं
करते ? युवक बोला -- नहीं आचार्य, मेरे
घरवाले ही मुझसे प्रेम नहीं करते।
आचार्य ने मुस्कराते हुए कहा -- प्रिय वत्स !
पहले तुम उनमें अपने लिए प्रेम पैदा करो।
यही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। हो
सकता है उसके बाद तुम्हें मेरी दीक्षा की
जरूरत ही न पड़े।



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